
जब हम भारत की बात करते हैं, तो हमारे जहन में रंगों, त्योहारों और अनगिनत संस्कृतियों की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर उभरती है。 इसी संस्कृति का सबसे जीवंत और दिल को छू लेने वाला हिस्सा हैं—यहां के नृत्य। अगर आप किसी भी सरकारी परीक्षा (जैसे UPSC, SSC, या State PSC) की तैयारी कर रहे हैं, या सिर्फ भारत की अद्भुत कला को करीब से जानना चाहते हैं, तो classical dances of india in hindi एक ऐसा टॉपिक है जिससे हर साल सवाल पूछे ही जाते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि किसी आम डांस फॉर्म को ‘शास्त्रीय’ या ‘क्लासिअल’ का दर्जा कैसे मिलता है? हमारे बॉलीवुड गानों या लोक नृत्यों (Folk Dances) की तरह ये सिर्फ खुशियों के मौके पर थिरकने तक सीमित नहीं होते। शास्त्रीय नृत्य पूरी तरह नियमों, अध्यात्म, भावनाओं, हस्त मुद्राओं और एक कड़े अनुशासन से बंधे होते हैं। इनका आधार है हजारों साल पुराना ग्रंथ—नाट्यशास्त्र, जिसे ऋषि भरत ने लिखा था और इसे भारतीय कला का ‘पंचम वेद’ भी कहा जाता है।
एक जरूरी बात जो आपको पता होनी चाहिए (Exam Pointer): भारत में शास्त्रीय नृत्यों को मुख्य रूप से मान्यता देने वाली संस्था संगीत नाटक अकादमी है, जिसके अनुसार भारत में कुल 8 शास्त्रीय नृत्य हैं। हालांकि, भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture) ‘छऊ (Chhau)’ नृत्य को भी इसमें शामिल करता है, जिससे यह संख्या 9 हो जाती है। लेकिन परीक्षा और किताबों के लिहाज से आपको मुख्य रूप से इन 8 नृत्यों पर ही फोकस करना है।
8 शास्त्रीय नृत्यों की क्विक गाइड तालिका (Master Summary Table)
| क्र.सं. | शास्त्रीय नृत्य (Dance Form) | संबंधित राज्य (State) | मुख्य पहचान / थीम (Key Feature) |
| 1 | भरतनाट्यम (Bharatanatyam) | तमिलनाडु | सबसे पुराना नृत्य शैली; प्राचीन समय में मंदिरों की देवदासियों (सदिर अट्टम) से जुड़ा था। |
| 2 | कथक (Kathak) | उत्तर प्रदेश (उत्तर भारत) | प्राचीन कथाकारों की कला; इसमें पैरों का बहुत तेज फुटवर्क (तत्कार) और स्पिन-चक्कर मुख्य हैं। |
| 3 | कथकली (Kathakali) | केरल | एक शक्तिशाली मूक नृत्य-नाटक (Dance-Drama); इसमें भारी वेशभूषा, हरा-लाल रंगीन मेकअप और नवरस मुख्य होते हैं। |
| 4 | कुचिपुड़ी (Kuchipudi) | आंध्र प्रदेश | नृत्य के साथ नाटक और वाचक (बोलने) का पुट; इसमें पीतल की थाली के किनारों पर पैर रखकर थिरकने (तरंगम) की परंपरा है। |
| 5 | ओडिसी (Odissi) | ओडिशा | भगवान जगन्नाथ की भक्ति पर आधारित; इसकी सबसे बड़ी पहचान शरीर की त्रिभंग मुद्रा (S-शेप पोस्चर) है। |
| 6 | मणिपुरी (Manipuri) | मणिपुर | राधा-कृष्ण की रासलीला पर केंद्रित; इसमें बेहद कोमल, धीमी गति की मूवमेंट होती है और बेलनाकार स्कर्ट (कुमिल) पहनी जाती है। |
| 7 | मोहिनीअट्टम (Mohiniyattam) | केरल | केवल महिलाओं द्वारा किया जाने वाला सौम्य एकल नृत्य (Solo); सफेद और सुनहरे बॉर्डर वाली ‘कसवु’ साड़ी इसकी मुख्य वेशभूषा है। |
| 8 | सत्त्रिया (Sattriya) | असम | 15वीं शताब्दी में महान वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव द्वारा असम के मठों (सत्रों) में शुरू किया गया आध्यात्मिक नृत्य। |
भारत के प्रमुख लोक नृत्य (State Wise List) | GK Short Tricks
भारत के सभी 8 शास्त्रीय नृत्यों का विस्तृत विवरण
1. भरतनाट्यम (Bharatanatyam) – तमिलनाडु
यह भारत का सबसे पुराना शास्त्रीय नृत्य माना जाता है। इसकी उत्पत्ति तमिलनाडु के मंदिरों में आराधना करने वाली ‘देवदासियों’ के नृत्य (जिसे पहले ‘सदिर अट्टम’ कहा जाता था) से हुई थी।
- मुख्य विशेषताएं: इसमें पैरों का एक खास झुकाव होता है जिसे ‘अरालमंडी’ (Araimandi) पोज कहते हैं। इसके साथ ही हाथ की हस्तमुद्राओं और आंखों के संचलन पर बहुत कड़ा नियंत्रण रखना पड़ता ह।。
- संगीत: यह पूरी तरह कर्नाटक शास्त्रीय संगीत (Carnatic Music) पर आधारित होता है।
- प्रसिद्ध कलाकार: रुक्मिणी देवी अरुंडेल, पद्मा सुब्रमण्यम, और यामिनी कृष्णमूर्ति।
2. कथक (Kathak) – उत्तर प्रदेश (उत्तर भारत)
‘कथा कहे सो कथक कहलावे’—यानी जो नृत्य के माध्यम से पूरी कहानी कह दे, वही कथक है。 इसकी शुरुआत प्राचीन काल के उन कथाकारों से हुई थी जो घूम-घूमकर मंदिरों और गांवों में पौराणिक कहानियां सुनाते थे।
- मुख्य विशेषताएं: मुगल काल में जब यह राजाओं के दरबारों में पहुंचा, तो इसमें फारसी शैली का मिश्रण हुआ。 इसकी सबसे बड़ी पहचान इसका बहुत तेज फुटवर्क (तत्कार) और बिजली जैसी फुर्ती से गोल-गोल चक्कर (Spins) काटना है।
- संगीत: यह मुख्य रूप से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत (जैसे ध्रुपद, ठुमरी) के साथ किया जाता है।
- प्रसिद्ध कलाकार: पंडित बिरजू महाराज, लच्छू महाराज, और सितारा देवी।
3. कथकली (Kathakali) – केरल
सोचिए कि मंच पर कोई कलाकार भारी-भरकम रंगीन पोशाक पहने खड़ा है और बिना एक शब्द बोले, सिर्फ अपनी आंखों की पुतलियों और भौहों की मूवमेंट से पूरी रामायण या महाभारत की कहानी बयां कर रहा है! यही जादू है कथकली का। यह एक मूक नृत्य-नाटक (Dance-Drama) है।
- मुख्य विशेषताएं: इसमें चेहरे पर किया जाने वाला भारी और रंगीन प्राकृतिक मेकअप (जैसे हरा रंग अच्छे चरित्र के लिए, लाल रंग बुराई के लिए) और विशाल मुकुट इसकी मुख्य पहचान हैं। इसमें चेहरे के 9 हाव-भाव यानी ‘नवरस’ (Navarasas) पर महारत हासिल करनी होती है।
- वाद्य यंत्र: चेंडा, मद्दलम और झांझ का मुख्य रूप से प्रयोग होता है।
4. कुचिपुड़ी (Kuchipudi) – आंध्र प्रदेश
इस शास्त्रीय नृत्य का नाम आंध्र प्रदेश के ‘कुचिपुड़ी’ (कृष्णा जिला) नामक गांव के नाम पर पड़ा है, जहां से इसकी शुरुआत हुई थी। इसमें नृत्य और नाटक दोनों विधाओं का एक अनूठा संगम देखने को मिलता है।
- मुख्य विशेषताएं: इसकी सबसे कठिन और प्रसिद्ध प्रस्तुति ‘तरंगम’ है, जिसमें डांसर एक पीतल की थाली के किनारों पर पैर रखकर और सिर पर पानी का कलश संतुलित करते हुए बड़ी खूबसूरती से थिरकता है।
- कलाकार: राजा और राधा रेड्डी, यामिनी कृष्णमूर्ति।
5. ओडिसी (Odissi) – ओडिशा
ओडिशा के प्राचीन मंदिरों और उदयगिरि की गुफाओं के शिलालेखों में इस नृत्य का हजारों साल पुराना इतिहास सुरक्षित है। यह नृत्य मुख्य रूप से भगवान जगन्नाथ (विष्णु जी के रूप) की भक्ति और प्रेम कहानियों पर केंद्रित है।
- मुख्य विशेषताएं: ओडिसी नृत्य की सबसे बड़ी पहचान इसकी ‘त्रिभंग’ (Tribhanga) मुद्रा है, जिसमें शरीर तीन जगहों से—सिर, छाती और कूल्हे से मुड़कर एक बेहद सुंदर ‘S’ जैसी आकृति बनाता है।
- प्रसिद्ध कलाकार: गुरु केलुचरण महापात्र (जिन्होंने इस नृत्य को पुनर्जीवित किया)।
6. मणिपुरी (Manipuri) – मणिपुर
पूर्वोत्तर भारत का यह नृत्य अपनी असाधारण शालीनता और शांत प्रकृति के लिए जाना जाता है। यह अन्य शास्त्रीय नृत्यों की तरह आक्रामक फुटवर्क वाला नहीं होता, बल्कि इसमें बहुत ही कोमल और प्रवाहमय गतियां होती हैं।
- मुख्य विशेषताएं: यह मुख्य रूप से भगवान कृष्ण और राधा जी की ‘रासलीला’ पर आधारित है。 इस नृत्य के दौरान महिलाएं लोहे के तारों से बनी एक खास बेलनाकार और कड़क स्कर्ट पहनती हैं जिसे ‘कुमिल’ (Kumil) कहा जाता है।
7. मोहिनीअट्टम (Mohiniyattam) – केरल
‘मोहिनी’ का अर्थ है मन को मोह लेने वाली सुंदर स्त्री और ‘अट्टम’ का अर्थ है नृत्य। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने भस्मासुर का वध करने के लिए मोहिनी का रूप धारण किया था, तब इस नृत्य शैली का जन्म हुआ। यह केवल महिलाओं द्वारा किया जाने वाला एक सम्मोहक एकल नृत्य (Solo Dance) है。
- मुख्य विशेषताएं: इसमें केरल की खूबसूरत नदियों की लहरों और ताड़ के पेड़ों की तरह शरीर को बहुत ही कोमलता से लहराया (Swaying Movements) जाता है। इसकी मुख्य वेशभूषा सफेद या ऑफ-व्हाइट रंग की ‘कसवु’ साड़ी होती है, जिस पर सुनहरे रंग का चमकीला बॉर्डर होता है।
8. सत्त्रिया (Sattriya) – असम
वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी द्वारा इसे शास्त्रीय नृत्य का दर्जा दिया गया। इसकी शुरुआत 15वीं शताब्दी में असम के महान समाज सुधारक और वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव ने की थी।
- मुख्य विशेषताएं: शंकरदेव जी ने इस नृत्य को असम के ‘सत्रों’ (वैष्णव मठों या कल्ट्स) में विकसित किया था, जहां भिक्षु कृष्ण भक्ति के नाटक और पौराणिक कहानियां प्रदर्शित करते थे। यह पूरी तरह से एक आध्यात्मिक और भक्तिपूर्ण कला है जो आज भी असम की धरोहर है।
याद रखने की जादुई शॉर्टकट ट्रिक (Mnemonic Box)
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए सभी राज्यों को याद रखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, इसलिए आप इस आसान सी लाइन को याद रख सकते हैं:
“भारत ने नाडु में कथा सुनाई UP को, केरल की कली मोहिनी संग पूरी खाकर अंधी हो गई।”
- भारत-नाडु = भरतनाट्यम (तमिलनाडु)
- कथा-UP = कथक (उत्तर प्रदेश)
- केरल की कली-मोहिनी = कथकली और मोहिनीअट्टम (केरल)
- पूरी-अंधी = कुचिपुड़ी (आंध्र प्रदेश)
शास्त्रीय नृत्य और लोक नृत्य में मुख्य अंतर (Classical vs Folk Dance)
बहुत से लोग इन दोनों विधाओं में भ्रमित हो जाते हैं, लेकिन इनमें एक बहुत स्पष्ट अंतर होता है:
- नियम और व्याकरण: शास्त्रीय नृत्य पूरी तरह से ‘नाट्यशास्त्र’ और प्राचीन ग्रंथों के कड़े नियमों, निश्चित हस्त मुद्राओं और व्याकरण से बंधे होते हैं। जबकि लोक नृत्य (Folk Dance) किसी क्षेत्र विशेष के आम लोगों द्वारा फसलों की कटाई, शादियों या स्थानीय त्योहारों की खुशी में बिना किसी कड़े नियम के सहजता से किए जाते हैं (जैसे—भांगड़ा, गरबा)。
- प्रशिक्षण (Training): शास्त्रीय नृत्य को सीखने के लिए गुरु-शिष्य परंपरा के तहत सालों के कड़े अभ्यास और विशेष ट्रेनिंग की जरूरत होती है। इसके विपरीत, लोक नृत्यों को बिना किसी विशेष ट्रेनिंग के, समाज को देखकर आसानी से सीखा जा सकता है。
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs on classical dances of india in hindi)
भारत में कुल कितने शास्त्रीय नृत्य हैं?
भारत की राष्ट्रीय संस्था संगीत नाटक अकादमी के अनुसार आधिकारिक रूप से 8 शास्त्रीय नृत्य हैं। हालांकि, भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय ‘छऊ’ नृत्य को मिलाकर कुल 9 शास्त्रीय नृत्य मानता है。 परीक्षाओं में सामान्यतः विकल्प के आधार पर 8 को ही प्राथमिकता दी जाती है।
भारत का सबसे प्राचीन शास्त्रीय नृत्य कौन सा है?
तमिलनाडु का भरतनाट्यम भारत का सबसे प्राचीन शास्त्रीय नृत्य माना जाता है, जिसका इतिहास मंदिरों की देवदासी परंपरा से जुड़ा है।
कथक और कथकली में क्या अंतर है?
कथक उत्तर भारत (मुख्यतः उत्तर प्रदेश) का नृत्य है जिसमें पैरों का तेज काम (तत्कार) और चक्कर मुख्य होते हैं। वहीं कथकली केरल का एक नृत्य-नाटक है जिसमें कलाकार भारी-भरकम रंगीन मुखौटे और पोशाक पहनकर चेहरे के हाव-भाव से कहानी कहते हैं।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षणिक और सामान्य ज्ञान के उद्देश्य (Educational Purposes) से साझा की गई है। हालांकि हमने सभी तथ्यों की सटीकता सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास किया है, फिर भी किसी भी परीक्षा या आधिकारिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित सरकारी विभाग या आधिकारिक वेबसाइट के डेटा को प्राथमिकता दें।
महत्वपूर्ण लिंक: भारत के शास्त्रीय नृत्यों, उनके इतिहास और सांस्कृतिक महत्व के बारे में और अधिक विस्तार से जानने के लिए आप भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल संगीत नाटक अकादमी (Sangeet Natak Akademi Official Website) पर जा सकते हैं।
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