
भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में Nehru Report 1928 केवल एक राजनीतिक दस्तावेज नहीं था, बल्कि यह भारत के लोगों द्वारा अपने देश के लिए एक लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और संपूर्ण लिखित संविधान तैयार करने का पहला संगठित प्रयास था। जब औपनिवेशिक हुकूमत भारतीयों को स्वशासन के अयोग्य मान रही थी, तब इस रिपोर्ट ने साबित कर दिया कि भारतीय नेतृत्व आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर राष्ट्र निर्माण के लिए पूरी तरह परिपक्व था।
Nehru Report UPSC, State PCS और इतिहास के शोधार्थियों के लिए यह विषय आधुनिक भारत के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है।
What is the Nehru Report 1928?
Nehru Report Kya Hai? सरल शब्दों में कहें तो यह अगस्त 1928 में भारतीय नेताओं द्वारा तैयार किया गया भारत का पहला अनौपचारिक संविधान मसौदा (Draft Constitution) था।
जब ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों को एक सर्वसम्मत संविधान बनाने की खुली चुनौती दी, तब कांग्रेस और अन्य प्रमुख दलों ने मिलकर एक उच्च स्तरीय समिति बनाई। इस समिति के अध्यक्ष पंडित मोतीलाल नेहरू थे, जिस कारण इस ऐतिहासिक दस्तावेज को Motilal Nehru Report कहा गया। इस रिपोर्ट में देश के भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था, मौलिक अधिकारों, धर्मनिरपेक्षता और प्रशासनिक ढांचे का स्पष्ट खाका खींचा गया था।
Historical Background: Simon Commission and Nehru Report Connection
1920 के दशक के उत्तरार्ध में भारतीय राजनीति में कई तेजी से बदलते घटनाक्रम देखने को मिले, जिनकी परिणति इस रिपोर्ट के रूप में हुई:
- Simon Commission Ka Aagman (1927): ब्रिटिश सरकार ने 1919 के भारत शासन अधिनियम की समीक्षा के लिए 1927 में साइमन कमीशन की घोषणा की। इस सात सदस्यीय आयोग में एक भी भारतीय सदस्य शामिल नहीं था। इसे भारतीयों के आत्मसम्मान पर सीधा हमला माना गया और ‘साइमन गो बैक’ के नारों के साथ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए।
- Lord Birkenhead Ki Chunauti: भारत के तत्कालीन राज्य सचिव (Secretary of State) लॉर्ड बर्कनहेड ने ब्रिटिश संसद में भारतीयों का उपहास उड़ाते हुए कहा कि भारत अनेक जातियों, धर्मों और विरोधी हितों का देश है और भारतीय नेता कभी ऐसा संविधान नहीं बना सकते जो सभी को स्वीकार्य हो।
- All Parties Conference: इस चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए फरवरी, मई और अगस्त 1928 में दिल्ली, बॉम्बे और लखनऊ में सर्वदलीय सम्मेलन बुलाए गए। इसमें 29 से अधिक राजनीतिक संगठनों ने हिस्सा लिया।
- Nehru Committee 1928 Ka Gathan: मई 1928 में बंबई अधिवेशन के दौरान एक 9 सदस्यीय समिति गठित की गई, जिसे तीन महीने के भीतर संविधान का खाका तैयार करने का दायित्व सौंपा गया।
Nehru Report Member List
इस ऐतिहासिक समिति में भारतीय समाज और राजनीति के विभिन्न वैचारिक वर्गों का प्रतिनिधित्व था:
- अध्यक्ष: पंडित मोतीलाल नेहरू (वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व विख्यात वकील)
- सचिव: पंडित जवाहरलाल नेहरू (युवा राष्ट्रवादी नेता)
- सर तेज बहादुर सप्रू: लिबरल फेडरेशन (संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ)
- सुभाष चंद्र बोस: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (वामपंथी/युवा दृष्टिकोण)
- एम. एस. अणे एवं एम. आर. जयकर: हिंदू महासभा
- सर अली इमाम एवं शुएब कुरैशी: मुस्लिम राष्ट्रवादी नेता
- सरदार मंगल सिंह: सिख समुदाय (शिरोमणि अकाली दल)
- जी. आर. प्रधान: गैर-ब्राह्मण व पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व
इस समिति ने दिन-रात कार्य कर अगस्त 1928 में अपनी विस्तृत रिपोर्ट लखनऊ सर्वदलीय सम्मेलन में प्रस्तुत की।
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Nehru Report Recommendations and Key Points
समिति ने भारत के लिए एक संपूर्ण, आधुनिक और संप्रभु लोकतांत्रिक व्यवस्था का प्रस्ताव रखा। Nehru Report ki pramukh sifarish निम्नलिखित थीं:
1. Dominion Status
रिपोर्ट का मुख्य लक्ष्य भारत को ब्रिटिश कॉमनवेल्थ के भीतर ‘डोमिनियन स्टेटस’ (स्वशासी उपनिवेश का दर्जा) दिलाना था, जैसा कि उस समय कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका को प्राप्त था।
2. Nehru Report 1928 Fundamental Rights
नेहरू रिपोर्ट ने पहली बार भारतीयों के लिए 19 मौलिक अधिकारों को संविधान में शामिल करने की सिफारिश की, जिनमें प्रमुख थे:
- विचार, अभिव्यक्ति, सभा और संगठन बनाने की पूर्ण स्वतंत्रता।
- पुरुषों और महिलाओं के लिए समान नागरिक व कानूनी अधिकार।
- अंतःकरण और धर्म का पालन करने व प्रचार करने की स्वतंत्रता।
- कानून के समक्ष सभी नागरिकों की पूर्ण समानता।
- बिना वारंट गिरफ्तारी और हिरासत के खिलाफ संरक्षण (Habeas Corpus)।
- निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का अधिकार।
3. Universal Adult Franchise & Joint Electorates
- सांप्रदायिक तनावों की जड़ माने जाने वाले पृथक निर्वाचन मंडल (Separate Electorates) को पूरी तरह समाप्त करने की सिफारिश की गई।
- सभी 21 वर्ष से अधिक आयु के वयस्क स्त्री-पुरुषों के लिए बिना किसी संपत्ति या कर-संबंधी शर्त के मतदान का अधिकार (Universal Adult Suffrage) प्रस्तावित किया गया।
- अल्पसंख्यकों के लिए केवल केंद्र और उन प्रांतों में उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित करने का प्रावधान था जहाँ वे अल्पसंख्यक थे (पंजाब और बंगाल को छोड़कर)।
4. Federal Structure Aur Shaktiyon Ka Bantwara
- भारत में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के स्पष्ट विभाजन के साथ एक संघीय शासन प्रणाली (Federal Setup) प्रस्तावित की गई।
- द्विसदनीय संसद (Bicameral Parliament) की स्थापना, जिसमें सीनेट (उच्च सदन) और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निम्न सदन) शामिल हों।
- सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers) राज्यों के बजाय केंद्र सरकार के पास रखने का प्रस्ताव था, ताकि देश की अखंडता बनी रहे।
5. Secular State & Judiciary
- स्पष्ट घोषणा की गई कि राज्य का कोई राजधर्म नहीं होगा और शासन व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर काम करेगी।
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए एक सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया।
Major Controversies: Political Reactions and Splits
नेहरू रिपोर्ट राष्ट्रीय सहमति बनाने के उद्देश्य से लाई गई थी, लेकिन इसके कई प्रावधानों पर गंभीर वैचारिक और सांप्रदायिक मतभेद पैदा हो गए:
1. Nehru Report Dominion Status Controversy
कांग्रेस के भीतर ही पीढ़ीगत संघर्ष खुलकर सामने आ गया:
- युवा वर्ग का रुख: जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे युवा नेता ब्रिटिश छत्रछाया में ‘Dominion Status’ की मांग से संतुष्ट नहीं थे। वे बिना किसी समझौते के ‘पूर्ण स्वराज’ (Complete Independence) चाहते थे।
- Independence for India League: इन युवा नेताओं ने नवंबर 1928 में ‘इंडिपेंडेंस फॉर इंडिया लीग’ की स्थापना कर कांग्रेस पर पूर्ण स्वतंत्रता को लक्ष्य बनाने का दबाव बनाया।
- महात्मा गांधी का समझौता: गांधीजी ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता करते हुए ब्रिटिश सरकार को 1 वर्ष का अल्टीमेटम दिया कि यदि 31 दिसंबर 1929 तक डोमिनियन स्टेटस स्वीकार नहीं किया गया, तो कांग्रेस पूर्ण स्वराज की घोषणा करेगी और सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करेगी।
2. Why Did Jinnah Reject Nehru Report?
मुस्लिम लीग के नेता मुहम्मद अली जिन्ना ने शुरुआत में रिपोर्ट के कई पहलुओं का समर्थन किया, लेकिन दिसंबर 1928 के कलकत्ता सर्वदलीय सम्मेलन में उन्होंने 3 प्रमुख संशोधन मांगे:
- केंद्रीय विधायिका में मुसलमानों के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की जाएं।
- पंजाब और बंगाल की विधानसभाओं में मुसलमानों के लिए उनकी जनसंख्या के आधार पर सीटें आरक्षित हों।
- अवशिष्ट शक्तियां केंद्र को नहीं, बल्कि स्वायत्त प्रांतों को दी जाएं।
हिंदू महासभा और सिख प्रतिनिधियों ने इन संशोधनों का कड़ा विरोध किया। संशोधन खारिज होने पर जिन्ना ने नेहरू रिपोर्ट से नाता तोड़ लिया और इसे “हिंदू बहुमत का दस्तावेज” करार दिया।
3. Jinnah 14 Points vs Nehru Report
नेहरू रिपोर्ट के विकल्प के रूप में मार्च 1929 में जिन्ना ने अपनी प्रसिद्ध 14 मांगें (Jinnah 14 Points) पेश कीं।
| तुलनात्मक बिंदु | Nehru Report 1928 | Jinnah’s 14 Points (1929) |
| निर्वाचन प्रणाली | संयुक्त निर्वाचन मंडल (Joint Electorates) | पृथक निर्वाचन मंडल (Separate Electorates) |
| अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers) | मजबूत केंद्र (Center) के पास | स्वायत्त प्रांतों (Provinces) के पास |
| केंद्रीय विधायिका में आरक्षण | जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व | मुसलमानों के लिए न्यूनतम 1/3 स्थायी आरक्षण |
| प्रांतीय स्वायत्तता | एकीकृत संघीय व्यवस्था | अत्यधिक प्रांतीय स्वायत्तता और वीटो पावर |
| सिंध का पृथक्करण | वित्तीय आत्मनिर्भरता की शर्त पर बॉम्बे से अलग | बिना किसी शर्त के तत्काल अलग प्रांत का दर्जा |
Constitutional Significance: Foundation of Indian Constitution 1950
नेहरू रिपोर्ट को यदि आधुनिक भारत के संविधान (1950) का ब्लूप्रिंट कहा जाए, तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी:
- मौलिक अधिकारों का आधार: 1928 में प्रस्तावित 19 अधिकारों में से अधिकांश को भारतीय संविधान के भाग-3 (अनुच्छेद 12 से 35) में ज्यों का त्यों शामिल किया गया।
- वयस्क मताधिकार: अनुच्छेद 326 के तहत बिना किसी लिंग या संपत्ति के भेदभाव के सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की अवधारणा सीधे इसी रिपोर्ट से ली गई।
- संसदीय व संघीय ढांचा: लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति की भूमिका वाली संसदीय व्यवस्था नेहरू रिपोर्ट की सिफारिशों का ही विकसित रूप है।
- पंथनिरपेक्षता (Secularism): राज्य का कोई धर्म न होने का सिद्धांत स्वतंत्र भारत की सबसे मजबूत संवैधानिक पहचान बना।
Nehru Report 1928 in Hindi: Quick Revision Summary (UPSC / State PCS)
- वर्ष व स्थान: अगस्त 1928, लखनऊ (सर्वदलीय सम्मेलन)।
- अध्यक्ष व सचिव: मोतीलाल नेहरू (अध्यक्ष), जवाहरलाल नेहरू (सचिव)।
- मुख्य उत्प्रेरक: साइमन कमीशन का बहिष्कार और लॉर्ड बर्कनहेड की चुनौती।
- प्रशासनिक मांग: ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत डोमिनियन स्टेटस।
- निर्वाचन ढांचा: पृथक निर्वाचन का खात्मा, संयुक्त निर्वाचन प्रणाली की वकालत।
- नागरिक अधिकार: 19 मौलिक अधिकार, पूर्ण लैंगिक समानता, अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा।
- प्रमुख असहमति: मुस्लिम लीग द्वारा अस्वीकृति (14 सूत्रीय मांगें) और युवा कांग्रेसियों द्वारा पूर्ण स्वराज की मांग।
- अंतिम परिणाम: 1929 के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित हुआ।
Frequently Asked Questions (PAA)
Who prepared the Nehru Report?
इस रिपोर्ट को पंडित मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता वाली 9 सदस्यीय सर्वदलीय समिति ने तैयार किया था, जिसमें तेज बहादुर सप्रू, सुभाष चंद्र बोस और अली इमाम जैसे प्रमुख नेता शामिल थे।
Nehru report kab pesh kiya gaya tha?
नेहरू रिपोर्ट को आधिकारिक तौर पर अगस्त 1928 में लखनऊ में आयोजित ऑल पार्टीज कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किया गया था।
What were the main proposals of the Motilal Nehru Report?
मुख्य प्रस्तावों में भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस, केंद्र में मजबूत संघीय ढांचा, 19 मौलिक अधिकार, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, संयुक्त निर्वाचन प्रणाली और धर्मनिरपेक्ष राज्य की स्थापना शामिल थी।
Why did Congress reject the Nehru Report?
कांग्रेस ने इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया था, बल्कि इसके ‘डोमिनियन स्टेटस’ वाले लक्ष्य को लेकर युवा नेताओं में मतभेद था। जब ब्रिटिश सरकार ने एक साल के भीतर इसे लागू नहीं किया, तो 1929 के लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने इस लक्ष्य को बदलकर ‘पूर्ण स्वराज’ कर दिया।
What is the difference between Nehru Report and Government of India Act?
नेहरू रिपोर्ट भारतीयों द्वारा तैयार किया गया एक लोकतांत्रिक व अधिकारों पर केंद्रित मसौदा था, जबकि गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट (1919/1935) ब्रिटिश संसद द्वारा भारत पर औपनिवेशिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए लागू किया गया कानून था।
नेहरू रिपोर्ट ब्रिटिश हुकूमत के उस भ्रम को तोड़ने वाला ऐतिहासिक दस्तावेज थी कि भारतीय स्वयं अपना शासन चलाने में असमर्थ हैं। राजनीतिक और सांप्रदायिक मतभेदों के कारण यह तात्कालिक रूप से कानून का रूप नहीं ले सकी, लेकिन इसने भारत के लोकतांत्रिक भविष्य का जो नक्शा खींचा, उसी पर आगे चलकर 1950 में स्वतंत्र भारत का संविधान निर्मित हुआ।
निष्कर्ष (Conclusion)
Nehru Report 1928 भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का वह ऐतिहासिक मोड़ थी जिसने साबित कर दिया कि भारतीय अपने देश का भविष्य और लोकतांत्रिक संविधान खुद तय करने में पूरी तरह सक्षम हैं। भले ही राजनीतिक मतभेदों और ब्रिटिश सरकार की हठधर्मिता के कारण यह ड्राफ्ट उस समय कानून का रूप नहीं ले सका, लेकिन इसने आने वाले स्वतंत्र भारत की रूपरेखा तैयार कर दी।
इस रिपोर्ट ने Dominion Status से आगे बढ़कर ‘पूर्ण स्वराज’ (Poorna Swaraj) की नींव रखी। साथ ही, इसमें प्रस्तावित 19 Fundamental Rights, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था आगे चलकर 1950 में लागू हुए स्वतंत्र भारत के संविधान के मुख्य आधार स्तंभ बने। आधुनिक भारतीय इतिहास और Nehru Report UPSC की दृष्टि से यह दस्तावेज औपनिवेशिक मानसिकता को चुनौती देने वाला भारत का पहला मील का पत्थर माना जाता है।
डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल शैक्षणिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें प्रस्तुत ऐतिहासिक तथ्य प्रामाणिक स्रोतों और संदर्भ पुस्तकों पर आधारित हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नवीनतम सिलेबस और आधिकारिक आयोगों के दिशा-निर्देशों का संदर्भ अवश्य लें।
Source:
Nehru Report 1928 Historical Background (Constitution of India)
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